राजन्! राजर्षि भरत के विषय में पण्डितजन ऐसा कहते हैं - जैसे गरुडजी की होड़ कोई मक्खी नहीं कर सकती, उसी प्रकार राजर्षि महात्मा भरत के मार्ग का कोई अन्य राजा मन से भी अनुसरण नहीं कर सकता।
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