कभी-कभी शीत, वायु आदि अनेक प्रकार के आधिदेविक, आधिभौतिक और आध्यात्मिक दु:खों की निवृत्ति करने में जब असफल हो जाता है, तब उस समय अपार विषयों की चिन्ता से यह खिन्न हो उठता है।
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