मुक्तस्ततो यदि बन्धाद्देवदत्त उपाच्छिनत्ति
तस्मादपि विष्णुमित्र इत्यनवस्थितिः ॥
यदि किसी प्रकार राजा आदि के बन्धन से छूट भी गया तो अन्याय से अपहरण किये हुए उन स्त्री और धन को देवदत्त नाम का कोई दूसरा व्यक्ति छीन लेता है और उससे विष्णुमित्र नाम का कोई तीसरा व्यक्ति झटक लेता है। इस प्रकार वे भोग एक पुरुष से दूसरे पुरुष के पास जाते रहते हैं, एक स्थान पर नहीं ठहरते।
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