अथ च तस्मादुभयथापि हि कर्मास्मि-
न्नात्मनः संसारावपनमुदाहरन्ति ॥
इसी से ऐसा कहते हैं कि प्रवृत्तिमार्ग में रहकर किये हुए लौकिक और वैदिक दोनों ही प्रकार के कर्म जीव को संसार की ही प्राप्ति कराने वाले हैं।
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