कभी अजगर सर्प का ग्रास बनकर वन में फेंके हुए मुर्दे के समान पड़ा रहता है। उस समय इसे कोई सुध-बुध नहीं रहती। कभी दूसरे विषैले जन्तु इसे काटने लगते हैं तो उनके विष के प्रभाव से अन्धा होकर किसी अन्धे कुएँ में गिर पड़ता है और घोर दुःखमय अन्धकार में बेहोश पड़ा रहता है।
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