कभी अपने से अधिक बलवान् लोग इसका धन छीन लेते हैं तो यह दुःखी होकर शोक और मोह से अचेत हो जाता है और कभी गन्धर्वनगर में पहुँचकर घड़ीभर के लिये सब दुःख भूलकर खुशी मनाने लगता है।
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