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परमहंसगीता • अध्याय 4 • श्लोक 23
नमो महद्भ्योऽस्तु नमः शिशुभ्यो नमो युवभ्यो नम आवटुभ्यः । ये ब्राह्मणा गामवधूतलिङ्गा- श्चरन्ति तेभ्यः शिवमस्तु राज्ञाम् ॥
ब्रह्मज्ञानियों में जो वयोवृद्ध हों, उन्हें नमस्कार है; जो शिशु हों, उन्हें नमस्कार है; जो युवा हों, उन्हें नमस्कार है और जो क्रीडारत बालक हों, उन्हें भी नमस्कार है। जो ब्रह्मज्ञानी ब्राह्मण अवधूतवेष से पृथ्वी पर विचरते हैं, उनसे हम-जैसे ऐश्वर्योन्मत्त राजाओं का कल्याण हो।
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