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परमहंसगीता • अध्याय 4 • श्लोक 21
राजोवाच अहो नृजन्माखिलजन्मशोभनं किं जन्मभिस्त्वपरैरप्यमुष्मिन् । न यद्धृषीकेशयशःकृतात्मनां महात्मनां वः प्रचुरः समागमः ॥
राजा रहूगण ने कहा - अहो! समस्त योनियों में यह मनुष्य-जन्म ही श्रेष्ठ है। अन्यान्य लोको में प्राप्त होने वाले देवादि उत्कृष्ट जन्मों से भी क्या लाभ है, जहाँ भगवान्‌ हृषिकेश के पवित्र यश से शुद्ध अन्तःकरण वाले आप जैसे महात्माओं का अधिकाधिक समागम नहीं मिलता।
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