रहूगण! तुम भी इसी मार्ग में भटक रहे हो, इसलिये अब प्रजा को दण्ड देने का कार्य छोड़कर समस्त प्राणियों के सुहृद् हो जाओ और विषयों में अनासक्त होकर भगवत्सेवा से तीक्ष्ण किया हुआ ज्ञानरूप खड़्ग लेकर इस मार्गको पार कर लो।
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