महाराज! उस जंगल में छ: डाकू हैं। इस वणिक-समाज का नायक बड़ा दुष्ट है। उसके नेतृत्व में जब यह वहाँ पहुँचता है, तब ये लुटेरे बलात् इसका सब माल-मत्ता लूट लेते हैं तथा भेड़िये जिस प्रकार भेड़ों के झुंड में घुसकर उन्हें खींच ले जाते हैं, उसी प्रकार इसके साथ रहने वाले गीदड़ ही इसे असावधान देखकर इसके धन को इधर-उधर खींचने लगते हैं।
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