इस भवाटवी में भटकने वाला यह बनिजारों का दल कभी किसी लता की डालियों का आश्रय लेता है और उस पर रहने वाले मधुरभाषी पक्षियों के मोह में फँस जाता है। कभी सिंहों के समूह से भय मानकर बगुला, कंक और गिद्धों से प्रीति करता है।
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