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परमहंसगीता • अध्याय 4 • श्लोक 16
प्रसज्जति क्वापि लता भुजाश्रय- स्तदाश्रयाव्यक्तपदद्विजस्पृहः । क्वचित्कदाचिद्धरिचक्रतस्त्रसन् सख्यं विधत्ते बककङ्कगृध्रैः ॥
इस भवाटवी में भटकने वाला यह बनिजारों का दल कभी किसी लता की डालियों का आश्रय लेता है और उस पर रहने वाले मधुरभाषी पक्षियों के मोह में फँस जाता है। कभी सिंहों के समूह से भय मानकर बगुला, कंक और गिद्धों से प्रीति करता है।
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