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परमहंसगीता • अध्याय 4 • श्लोक 10
कर्हि स्म चित्क्षुद्ररसान् विचिन्वं- स्तन्मक्षिकाभिर्व्यथितो विमानः । तत्रातिकृच्छ्रात्प्रतिलब्धमानो बलाद्विलुम्पन्त्यथ तं ततोऽन्ये ॥
कभी मधु खोजने लगता है तो मक्खियाँ इसके नाक में दम कर देती हैं और इसका सारा अभिमान नष्ट हो जाता है। यदि किसी प्रकार अनेकों कठिनाइयों का सामना करके वह मिल भी गया तो बलातू दूसरे लोग उसे छीन लेते हैं।
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