मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
परमहंसगीता • अध्याय 3 • श्लोक 8
यदा क्षितावेव चराचरस्य विदाम निष्ठां प्रभवं च नित्यम् । तन्नामतोऽन्यद्व्यवहारमूलं निरूप्यतां सत्क्रिययानुमेयम् ॥
हम देखते हैं कि सम्पूर्ण चराचर भूत सर्वदा पृथ्वी से ही उत्पन्न होते हैं और पृथ्वी में ही लीन होते हैं; अत: उनके क्रियाभेद के कारण जो अलग-अलग नाम पड़ गये हैं - बताओ तो, उनके सिवा व्यवहार का और क्‍या मूल है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
परमहंसगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

परमहंसगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें