हम देखते हैं कि सम्पूर्ण चराचर भूत सर्वदा पृथ्वी से ही उत्पन्न होते हैं और पृथ्वी में ही लीन होते हैं; अत: उनके क्रियाभेद के कारण जो अलग-अलग नाम पड़ गये हैं - बताओ तो, उनके सिवा व्यवहार का और क्या मूल है?
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