ब्राह्मण उवाच
अयं जनो नाम चलन् पृथिव्यां
यः पार्थिवः पार्थिव कस्य हेतोः ।
तस्यापि चाङ्घ्र्योरधिगुल्फजङ्घा-
जानूरुमध्योरशिरोधरांसाः ॥
जडभरत ने कहा - हे पृथ्वीपते! यह देह पृथ्वी का विकार है, पाषाणादि से इसका क्या भेद है? जब यह किसी कारण से पृथ्वी पर चलने लगता है, तब इसके भारवाही आदि नाम पड़ जाते हैं। इसके दो चरण हैं; उनके ऊपर क्रमश: टखने, पिंडली, घुटने, जाँच, कमर, वक्ष:स्थल, गर्दन और कंधे आदि अंग हैं।
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