मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
परमहंसगीता • अध्याय 3 • श्लोक 5
ब्राह्मण उवाच अयं जनो नाम चलन् पृथिव्यां यः पार्थिवः पार्थिव कस्य हेतोः । तस्यापि चाङ्घ्र्योरधिगुल्फजङ्घा- जानूरुमध्योरशिरोधरांसाः ॥
जडभरत ने कहा - हे पृथ्वीपते! यह देह पृथ्वी का विकार है, पाषाणादि से इसका क्‍या भेद है? जब यह किसी कारण से पृथ्वी पर चलने लगता है, तब इसके भारवाही आदि नाम पड़ जाते हैं। इसके दो चरण हैं; उनके ऊपर क्रमश: टखने, पिंडली, घुटने, जाँच, कमर, वक्ष:स्थल, गर्दन और कंधे आदि अंग हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
परमहंसगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

परमहंसगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें