इसलिये विरक्त महापुरुषों के सत्संग से प्राप्त ज्ञानरूप खड़्ग के द्वारा मनुष्य को इस लोक में ही अपने मोहबन्धन को काट डालना चाहिये। फिर श्रीहरि की लीलाओं के कथन और श्रवण से भगवत्स्मृति बनी रहने के कारण वह सुगमता से ही संसारमार्ग को पार करके भगवान् को प्राप्त कर सकता है।
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