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परमहंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 4
न वयं नरदेव प्रमत्ता भवन्नियमानुपथाः साध्वेव वहामः अयमधुनैव नियुक्तोऽपि न द्रुतं व्रजति नानेन सह वोढुमु ह वयं पारयाम इति ॥
महाराज! यह हमारा प्रमाद नहीं है, हम आपकी नियम-मर्यादा के अनुसार ठीक-ठीक ही पालकी ले चल रहे हैं। यह एक नया कहार अभी-अभी पालकी में लगाया गया है तो भी यह जल्दी-जल्दी नहीं चलता। हम लोग इसके साथ पालकी नहीं ले जा सकते।
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