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परमहंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 3
अथ त ईश्वरवचः सोपालम्भमुपाकर्ण्यो- पायतुरीयाच्छङ्कितमनसस्तं विज्ञापयां बभूवुः ॥
तब अपने स्वामी का यह आक्षेपयुक्त वचन सुनकर कहारों को डर लगा कि कहीं राजा उन्हें दण्ड न दें। इसलिये उन्होंने राजा से इस प्रकार निवेदन किया।
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