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परमहंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 19
अहं च योगेश्वरमात्मतत्त्वविदां मुनीनां परमं गुरुं वै । प्रष्टुं प्रवृत्तः किमिहारणं तत्साक्षाद्धरिं ज्ञानकलावतीर्णम् ॥
मैं आत्मज्ञानी मुनियों के परम गुरु और साक्षात्‌ श्रीहरि की ज्ञानशक्ति के अवतार योगेश्वर भगवान्‌ कपिल से यह पूछने के लिये जा रहा था कि इस लोक में एकमात्र शरण लेने योग्य कौन है?
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