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परब्रह्म • अध्याय 1 • श्लोक 8
तत्सूत्रं विदितं येन स मुमुक्षुः स भिक्षुकः । स वेदवित्सदाचारः स विप्रः पंक्तिपावनः ॥
उस सूत्र (ब्रह्मसूत्र) का जिसे ज्ञान हो गया, वहीं मुमुक्षु, भिक्षुक, वेदज्ञ, सदाचारी और विप्र है, जो अनेक प्राणियों को पावन करता है।
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