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परब्रह्म • अध्याय 1 • श्लोक 6
सशिखं वपनं कृत्वा बहि:सूत्रं त्यजेद्ब्रुधः। यदक्षरं परंब्रह्म तत्सूत्रमिति धारयेत् ॥
बुद्धिमानों (अर्थात् उपर्युक्त स्थिति वालों) को शिखा सहित केश कर्तन करके वाह्य उपवीत (यज्ञोपवीत) का विसर्जन कर देना चाहिए और अक्षर ब्रह्म को ही सूत्र स्वरूप धारण करना चाहिए ।
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