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परब्रह्म • अध्याय 1 • श्लोक 11
सूत्रमन्तर्गतं येषां ज्ञानयज्ञोपवीतिनाम्। ते तु सूत्रविदो लोके ते च यज्ञोपवीतिनः ॥
संसार में जिन यज्ञोपवीतधारियों के यज्ञोपवीत (सूत्र) के अन्तर्गत ज्ञान समाहित है, वे ही इस जगत् में सूत्रविद् और सच्चे यज्ञोपवीतधारी हैं।
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