क्योंकि उपनिषद वाक्यों के यह प्रमाण हैं -
तत्वमसि = वह तू है।
ब्रह्माहमस्मि = वह मैं हूँ।
प्रज्ञानमानन्दं ना - जिससे जाना जाता है व सुख स्वरूप मैं हूँ।
अयमात्मा ब्रह्म - यह आत्मा (अपना वास्तविक स्वरूप) ब्रह्म है।
इत्यादि श्रुतियोंसे जाना गया है। यह पंचीकरण नाम का विचार होता है।
।। इति प्रभीकरण अर्थाद ओम् का अर्थ।।
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