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पंचीकरणम • अध्याय 1 • श्लोक 7
तत्वमसि । ब्रह्माहमस्मि । प्रज्ञानमानन्दं ब्रह्म । अयमात्मा ब्रह्म । इत्यादि श्रुतिभ्यः । इति पंचीकरणं भवति ॥ ॥ इति श्रीमत्परमहंस परिणामकाचार्य श्रीमच्छंकराचार्य निरचितं पंचोकरसम् ॥
क्योंकि उपनिषद वाक्यों के यह प्रमाण हैं - तत्वमसि = वह तू है। ब्रह्माहमस्मि = वह मैं हूँ। प्रज्ञानमानन्दं ना - जिससे जाना जाता है व सुख स्वरूप मैं हूँ। अयमात्मा ब्रह्म - यह आत्मा (अपना वास्तविक स्वरूप) ब्रह्म है। इत्यादि श्रुतियोंसे जाना गया है। यह पंचीकरण नाम का विचार होता है। ।। इति प्रभीकरण अर्थाद ओम् का अर्थ।।
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