पञ्चीकृतपञ्चमहाभूतानि तत्कार्यं च सर्वं विरा- डित्युच्यते, एतत्स्थूलशररिमात्मनः । इन्द्रियैरथों- पलब्धिर्जागरितम् । एतदुभयाभिमान्यात्मा विश्व एतत्त्रयमकारः ॥
पञ्चीकरण किये हुये पांचो महाभूत और इनका कार्य सब विराट कहा जाता है। यह विराट (संसार) और अपना शरीर स्थूल है। इन्द्रियों से विषयों का साक्षात्कार (शब्द स्पर्श रूप रस गन्ध आदि का ज्ञान होना) जागरित (जाग्रदवस्था कहाती) है। इन दोनों (स्थूल जागरित) का अभिमानी आत्मा विश्व कहलाता है यह तीनों अर्थात् स्थूल जागरित तथा विश्व (ओंकार का प्रथम अक्षर) अकार (अ कहे जाते हैं)।
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