पांचों भूतों में से प्रत्येक के दो दो हिस्से करके अपने आधे आधे भाग को छोड़ कर और आधे आधे भाग के चार चार टुकड़े करके दूसरों में से मिला देने पर पञ्चीकरण होता (अर्थात् प्रत्येक भूतों में आधा अपना और आधे में चौथाई चौथाई दूसरे भूत मिलना पञ्श्वीकरण कहाता है, राशि पूरी बनी रहते संमिश्रण हो जाना पञ्चीकरण है)। यह पञ्चीकरण माया रूप दृष्टि गोचर होता है। इस प्रकार अध्यारोप (संघात को दूसरा पदार्थ समझना) अपवाद (संघात को पृथक २ करके मूल तत्व खोजना) से वही प्रपञ्च रहित (ब्रह्म) प्रपञ्चित होता है।
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