पराशक्ति भगवती के शक्तिपात से पवित्र बने हुए भाग्यशाली भक्त-जन सहजदयामय सद्गुरु के कटाक्ष से अपने परमधाम में प्रविष्ट होकर स्वात्म- स्वरूपात्मिका भगवती को सदा के लिए प्राप्त करते हैं, जो भगवती समस्त षडध्वारूपी अन्धकार को काटने से अत्यन्त करुणामयी है और क्षणमात्र में भक्त की आत्मा को शिवमय बनाती है और इसीलिए परानन्द रूप बनी हुई है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।