हे माता! चन्द्रमा, विष्णु, ब्रह्मा, प्रकृति, जीवात्मा, परमात्मा, सूर्यदेवता, परमशिव का स्वरूप, बौद्धों के श्रेष्ठगुरु बुद्ध, आकाश, वायु, शिव और शक्ति - इन विकल्पात्मक शास्त्रोक्त नामों से सन्त-जन आप महात्रिपुरसुन्दरी को ही पुकारते रहते हैं। भाव यह है कि जितने भी नाम संसार में हैं वे सभी नाम आप जगद्रूपिणी माता के ही हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।