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पञ्चस्तवी • अध्याय 5 • श्लोक 33
विधुर्विष्णुर्ब्रह्मा प्रकृतिरणुरात्मा दिनकरः स्वभावो जैनेन्द्रः सुगतमुनिराकाशमनिलः । शिवः शक्तिश्चेति श्रुतिविषयतां तामुपगतां विकल्पैरेभिस्त्वामभिदधति सन्तो भगवतीम् ।।
हे माता! चन्द्रमा, विष्णु, ब्रह्मा, प्रकृति, जीवात्मा, परमात्मा, सूर्यदेवता, परमशिव का स्वरूप, बौद्धों के श्रेष्ठगुरु बुद्ध, आकाश, वायु, शिव और शक्ति - इन विकल्पात्मक शास्त्रोक्त नामों से सन्त-जन आप महात्रिपुरसुन्दरी को ही पुकारते रहते हैं। भाव यह है कि जितने भी नाम संसार में हैं वे सभी नाम आप जगद्रूपिणी माता के ही हैं।
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