मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पञ्चस्तवी • अध्याय 5 • श्लोक 29
कणास्त्वद्दीप्तीनां रविशशिकृशानुप्रभृतयः परं ब्रह्म क्षुद्रं तव नियतमानन्दकणिका । शिवादिक्षित्यन्तं त्रिवलयतनोः सर्वमुदरे तवास्ते भक्तस्य स्फुरसि हृदि चित्रं भगवति । ।।
हे भगवती! सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि आदि सभी प्रकाश आपकी रश्मियों के कण-मात्र हैं। परिपूर्ण शिव रूप ब्रह्म भी आपके महान् तेज के सामने क्षुद्र अर्थात् तुच्छ बना हुआ उस आपके अगाध तेज का एक कण है - यह तो मैंने समझ लिया है। इसके अतिरिक्त शिव तत्त्व से लेकर पृथ्वी तक सभी तत्त्व भी त्रिवलयाकार कुण्डलिनी के बीच में ठहरे हुए हैं। इस प्रकार आपका आश्चर्यपूर्ण स्वरूप आपके भक्त के हृदय में अनुभव किया जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें