पिता माता भ्राता सुहृदनुचराः सद्म गृहिणी वपुः पुत्रो मित्रं धनमपि यदा मां विजहति । तदा मे भिन्दाना सपदि भयमोहान्धतमसं महाज्योत्स्ने ! मातर्भव करुणया सन्निधिकरी ।।
हे माता! जिस देहत्यागक्षणात्मक मृत्यु के समय मुझे अपना पिता, माता, भाई, सखा, अनुचर, घर, पुत्र, गृहिणी, मित्र, धन तथा शरीर-ये सारे के सारे परवश होकर छोड़ने पड़ेंगे, उस समय हे महाप्रकाशमयी भगवती! आप कृपा करके सभी भय, मोह और अन्धकार आदि विघ्नों को काट देना और मुझे अपना तुच्छ सेवक समझ कर दर्शन देना।
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