हे माता! काम, क्रोध आदि मानसिक विकारों का नाश करके भी मुनि-जनों के मन सदैव भयग्रस्त होने के कारण आपके अत्यन्त कोमल ज्ञानक्रियात्मक पद-पंकज का स्पर्श नहीं कर पाते। इसलिए हे पार्वती! वेदादि श्रुतियों के शिरोमणि अर्थात् ऋग् आदि तीन वेदों में जो प्रधान बने हुए उपनिषद् भाग हैं, स्वभाव से वे सारे उपनिषद् अकोमल और कर्कश हैं वे आपके कोमलतम स्थान को कैसे प्राप्त हो सकते हैं अथवा प्राप्त करा सकते हैं।
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