मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पञ्चस्तवी • अध्याय 4 • श्लोक 8
अज्ञातसम्भवमनाकलितान्ववायं भिक्षु कपालिनमवाससमद्वितीयम् पूर्व करग्रहणमङ्गलतो भवत्याः शम्भुं क एव बुबुधे गिरिराजकन्ये ।।
हे हिमालय पर्वतराज की पुत्री! जिन महादेव जी का जन्म अज्ञात है, जिनके वंश को कोई भी नहीं जानता, जो खप्पर में भिक्षा ग्रहण करते हैं, (जिनका निवासस्थान कोई नहीं है) जिनको पहनने के लिए कोई वस्त्र नहीं है - ऐसे अनिकेत अद्वितीय भगवान् शंकर को, आपके मंगलात्मक पाणिग्रहण करने से पूर्व भला कौन जानता था, कोई भी तो नहीं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें