हे देवी! जो मुख आपको स्तुति करने में लगा हो, जो शिर आपको भक्ति से नमस्कार करता हो और हे माता! जो हृदय आपके ध्यान में तत्पर बना हो, वे मुख, सिर तथा हृदय किसी ही भाग्यशाली व्यक्ति को किन्हीं अलौकिक विशेष तपस्याओं के फल-स्वरूप प्राप्त होते हैं।
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