हे समस्त भुवनों की मांता! आपका (श्रेष्ठ) स्वरूप कुवलय नामी पुष्पों के पत्ते के समान नीला तथा भूरे चिकने केशों से युक्त है। इसके अतिरिक्त ज्ञान-क्रिया रूपी स्तनों की फैलावट से युक्त आपका सुन्दर वक्षस्थल से सुशोभित शरीर, महादेव के शरीर के साथ सदैव लगा रहता है। ज्यादा कहने से इस समय क्या लाभ है - आपका यह स्वरूप हमें सदा के लिए प्रकट रहे।
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