जो भाग्यशाली जन, भोग अर्थात् सांसारिक ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए ही आपको प्रणाम करते हैं वे फलतः हजारों लक्ष्मियों को अपने नेत्रों के इशारों से हो अपनी दासियां बना देते हैं। इसके अतिरिक्त चिन्तामणि-रत्नों की ढेर से बनाये हुए पर्वत पर, जो उनके लिए क्रीड़ास्थल के रूप में निर्मित हुआ होता है, वे ऐसे ही पर्वत के कल्प-वृक्षों से प्रपूरित वनस्थली में अनन्त समय के लिए रमण करते हैं अर्थात् वहीं रहते हैं। भाव यह है कि जो भक्त सांसारिक ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए भी आपकी उपासना करते हैं उन्हें भी आप अपने असाधारण एवं अलौकिक ऐश्वर्य को प्रदान करती हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।