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पञ्चस्तवी • अध्याय 4 • श्लोक 15
बर्हावतंसयुतबर्बरकेशपाशां गुञ्जावलीकृतघनस्तनहारशोभाम्। श्यामां प्रवालवदनां सुकुमारहस्तां त्वामेव नौमि शवरों शवरस्य जायाम् ।।
(हे पार्वती जी) आप मोर पंखों के मुकुट को धारण करती हुई भूरे अर्थात् सुनहरी रंग के जटा-जूट से युक्त हैं। घुंघचियों की पहनी हुई माला आपके स्तनों की शोभा बढ़ाती है। आप श्यामा रूप को धारण करती हुई सुन्दर मुखाकृति और कोमल हाथों से युक्त हैं। इस प्रकार शिकारी का रूप धारण करने वाले शंकर जी की पत्नी शिकारिण का रूप धारण करने वाली आप भगवती की मैं स्तुति करता हूं।
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