पूनम के चमकते हुए चन्द्रमा की नाईं, अधिक मात्रा में बहते हुए अमृत के झरनों की भांति, क्षीर-समुद्र के अधिकाधिक लहरों की भांति, अमृतरूपी मिट्टी के गोलों को तरह या हिम की नाईं निर्मित आपका श्वेत स्वरूप का ध्यान जो श्रद्धा-पूर्वक करते हैं, वे अपने हृदय में ही पीड़ा आपदाओं तथा दयनीयता को नष्ट करके मोक्ष-रूपिणी संपदा अर्थात् मोक्षलक्ष्मी को धारण करते हैं।
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