मन्त्रहीनं क्रियाहीनं विधिहीनं च यदगतम्। त्वया तत्क्षम्यतां देवि ! कृपया परमेश्वरि ।।
इति श्री पञ्चस्तव्यां घटस्तवः तृतीयः समाप्तः ।।
हे परमेश्वरी देवी ! मन्त्र-रहित, क्रिया-रहित अथवा विधि-रहित जो कुछ भी मुझसे हुआ है, हे माता ! आप उस सब कुछ के लिए कृपा करके मुझे क्षमा कीजिए।
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