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पञ्चस्तवी • अध्याय 3 • श्लोक 22
दर्शनात्पापशमनी जपान्मृत्युविनाशिनी । पूजिता दुःखदौर्भाग्यहरा त्रिपुरसुन्दरी ।।
आप जगदम्बा त्रिपुरसुन्दरी भगवती दर्शन-मात्र से ही सभी पापों को नष्ट करती हैं, जप करने से मृत्यु का नाश करती हैं अर्थात् मुक्त बना देती हैं और पूजा करने से समस्त दुःखों तथा कुभाग्यों को दूर करती हैं।
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