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पञ्चस्तवी • अध्याय 3 • श्लोक 20
शब्दब्रह्ममयि ! स्वच्छे देवि त्रिपुरसुन्दरि ! यथाशक्ति जपं पूजां गृहाण परमेश्वरि ।।
हे शब्दब्रह्म-स्वरूपा परा देवी! हे निर्मल त्रिपुरा देवी! हे परमेश्वरी! मैं अपनी शक्ति के अनुसार जो भी पूजा अथवा जप करता हूं, उसे आप (सहर्ष) स्वीकार कीजिए।
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