हे भवानि ! जो भक्त, लाख के रस में भिगोये हुए कमल के सूत के समान अत्यन्त सूक्ष्म और लालिमा से युक्त आपके स्वरूप का स्मरण अपने हृदय में प्रतिदिन करता है, उसे कामदेव के समान सुन्दर मानकर अत्यन्त अद्वितीय सौन्दर्य वाली और हिरण के समान सुन्दर नेत्रों वाली युवतियां अपने नेत्र रूपी कमलों के द्वारा उपासना करती हैं। भाव यह है कि उस भक्त की सभी करणेश्वरी शक्तियां उसे प्रथमाभास-धाम में ही स्थित करती हैं, जिसके फलस्वरूप वह भक्त, सदा के लिए आपके चिदानन्द-स्वरूप में लय हो जाता है।
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