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पञ्चस्तवी • अध्याय 2 • श्लोक 31
ब्रह्मेन्द्ररुद्रहरिचन्द्रसहस्त्ररश्मिस्कन्दद्विपाननहुताशनवन्दितायै। बागीश्वरि ! त्रिभुवनेश्वरि । विश्वमातरन्तर्बहिश्च कृतसंस्थितये नमस्ते ।। इति श्रीधर्माचार्यकृतौ पञ्चस्तव्यां चर्चास्तवो द्वितीयः ।।
हे महासरस्वती देवी की ईश्वरी! हे जाग्रत-स्वप्न-सुषप्ति - इन तीन लोकों की स्वामिनी! हे जगन्माता! आपके स्वरूप को ब्रह्मा, इन्द्र, रुद्र, नारायण, चन्द्रमा, सूर्यभगवान्, कुमार जी, गणेश जी और अग्निदेवता प्रणाम करते हैं। आप इस समस्त संसार के भीतर और बाहर ठहरी हुई हैं। आपको मेरा प्रणाम हो।
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