हे अज्ञान रूपी अन्धकार को नष्ट करने वाली ! जन्म-मृत्यु से पीड़ित सभी प्राणियों के द्वारा वन्दन की गई चरण-कमलों वाली हे देवी! हे कमल-पत्रों की शोभा के समान नेत्रों की कान्ति युक्त बनी हुई माता! हे संकल्प-विकल्प-रूपी मालिन्य से रहित करने वाली राजहंसिनी ! आप अपने भक्तों पर आई हुई आपदाओं को नष्ट करती हैं, अतः मेरी आपदाओं का भी नाश कीजिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।