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पञ्चस्तवी • अध्याय 2 • श्लोक 22
त्वां व्यापिनीति समना इति कुण्डलीति त्वां कामिनीति कमलेति कलावतीति । त्वां मालिनीति ललितेत्यपराजितेति देवि ! स्तुवन्ति विजयेति जयेत्युमेति ।।
हे देवी ! आप व्यापिनी-शक्ति हैं, समना हैं, कुण्डलिनी-भगवती हैं, आप कामिनी अर्थात् कामेश्वरी रूपा हैं, आप लक्ष्मी हैं तथा स्वातन्त्र्य-शक्ति हैं, आप मालिनी, ललिता, अपराजिता, विजया, जया और उमा हैं - इस प्रकार सद्भक्त आपकी स्तुति करते हैं।
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