हे शिव को अपनी ओर आकर्षित करने वाली देवी! जब आप शिव को अपनी इच्छा के अनुरूप अपने उत्कृष्ट-गुणों के सदृश परामर्श के बल से बनाती हैं तो उसी समय वह भगवान् शिव भी तीन भुवनों का गुरु तथा तीन भुवनों के सृजन और संहार करने में समर्थ सूत्रधार अर्थात् त्रिभुवन-नाटक रचाने में समर्थ बन जाता है।
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