मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
पञ्चस्तवी • अध्याय 2 • श्लोक 16
इच्छाऽनुरूपमनुरूपगुणप्रकर्ष सङ्कर्षिणि ! त्वमनुसृत्य यदा बिभर्षि। जायेत स त्रिभुवनैक गुरुस्तदानीं देवः शिवोऽपि भुवनत्रयसूत्रधारः ।।
हे शिव को अपनी ओर आकर्षित करने वाली देवी! जब आप शिव को अपनी इच्छा के अनुरूप अपने उत्कृष्ट-गुणों के सदृश परामर्श के बल से बनाती हैं तो उसी समय वह भगवान् शिव भी तीन भुवनों का गुरु तथा तीन भुवनों के सृजन और संहार करने में समर्थ सूत्रधार अर्थात् त्रिभुवन-नाटक रचाने में समर्थ बन जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें