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पञ्चस्तवी • अध्याय 2 • श्लोक 1
आनन्दसुन्दरपुरन्दरमुक्तमाल्यं मौलौ हठेन निहितं महिषासुरस्य । पादाम्बुजं भवतु मे विजयाय मञ्जु मञ्जीरशिञ्जितमनोहरमम्बिकायाः ।।
पायजेब नूपुर की घनघनाहट के कारण मनोहारी, महिषासुर के सिर पर आग्रह-पूर्वक रखा गया है और इसी कारण आनन्द से सुन्दर अर्थात् प्रसत्र बने हुए इन्द्र द्वारा उपहार की गई माला वाला माता दुर्गा जगज्जननी का सुन्दर-चरण कमल मेरी विजय के लिये बना रहे।
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