हे सदा एकवत् रहने वाली देवी! आपका जो दूसरा कामराज-नामक निष्कल अर्थात् कलना-रहित अथवा 'क-ल' -रहित क्लीं बीजाक्षर है, इस मन्त्र का जप, यदि कोई विरला बुद्धिमान् व्यक्ति इस संसार में करे तो वह सारस्वत क्लीं बीजाक्षर का साक्षात्कार करके सरस्वती देवी के अनुग्रह का पात्र बनता है। इस बीजाक्षर के जप के संबन्ध में यह कहना अप्रासंगिक न होगा कि सत्यवादी श्री हरिश्चन्द्र ने इस मन्त्र को सिद्ध किया था, जिसके फलस्वरूप सभी ब्राह्मण प्रत्येक उत्सव के प्रारम्भ में उसकी कथा उसी आदर से वर्णन करते हैं, जिस आदर से ओं का उच्चारण प्रत्येक यज्ञ के आद्य में किया जाता है।
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