सरस्वती भगवती की यह तीन अवस्थाओं को पूर्ण करने वाली त्रिपुरा नाम वाली स्तुति, मन को एकाग्र बना कर तथा देवी की भक्ति में लीन होकर शिव-शक्तिपात से अनुगृहीत बने हुए विद्वानों को भली-भांति समझनी चाहिये। जहां इस स्तुति के प्रथम श्लोक में एक अर्थात् पहिले ऐं, दो अर्थात् दूसरे क्लीं, तीन अर्थात् तीसरे सौः- इन तीन पदों के क्रम से युक्त आपके चरणों के साथ संबन्ध रखने वाले बीजाक्षरों के द्वारा मन्त्रोद्धार की विधि विशेषपूर्वक वर्णन की गई है, वहां यह स्तुति गुरुजनों के सत्संप्रदाय से भी युक्त है अर्थात् गुरुजनों के द्वारा ही इस स्तुति का प्रादुर्भाव हुआ है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
पञ्चस्तवी के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
पञ्चस्तवी के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।