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पञ्चस्तवी • अध्याय 1 • श्लोक 16
देवानां त्रितयं त्रयी हुतभुजां शक्तित्रयं त्रिस्वरा स्त्रैलोक्यं त्रिपदी त्रिपुष्करमथो त्रिब्रह्म वर्णास्त्रयः। यत्किचिज्जगति त्रिधा नियमितं वस्तु त्रिवर्गात्मकं तत्सर्वं त्रिपुरेति नाम भगवत्यन्वेति ते तत्त्वतः ।।
'ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र' - तीन देवताओं का वर्ग, 'ऋक, यजु, साम' - वेदत्रयी, अग्नि देवता की तीन शक्तियां - 'गार्हपत्य, आहवनीय, दक्षिणाग्नि', तीन स्वर - 'उदात्त, अनुदात्त, स्वरित', तीन लोक - 'भूः, भुवः, स्वः', गायत्री के तीन पद - 'भूः, भुवः, स्वः', ज्योतिष शास्त्र में वर्णित तीन पुष्कर - योग, तीन ब्रह्म - ओं, तत् सत्' और तीन वर्ण - 'अ, उ, म' - इसी भांति संसार में जो भी तीन-तीन रूप वाली वस्तु नियमित कही गई हैं, वह सभी 'त्रिपुरा' अर्थात् तीन स्वरूपों को पूर्ण करने वाली भगवती के नाम के ही अनुगामी अर्थात् परिचायक हैं।
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