हे देवी ! हे त्रिपुरा भगवती ! (आप के भक्त-जन) ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शूद्र क्रम से दूध, घी, शहद तथा मदिरा से आप (विश्वोत्तीर्णा और विश्वमयी) देवी की पूजा करके आपको सन्तुष्ट करते हैं। उसके फलस्वरूप उन स्थिरबुद्धि वालों का मन जिस भी यथाभिलषित वस्तु की याचना आपके सम्मुख करता है वे अभीष्ट सिद्धियां उसे निर्विघ्न बनकर प्राप्त होती हैं।
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