तीर्थे श्वपचगृहे वा तनुं विहाय याति कैवल्यम्। प्राणानवकीर्य याति कैवल्यम्॥
ज्ञानी पुरुष तीर्थ में शरीर त्याग करे अथवा चाण्डाल के घर में, प्राणों को छोड़कर वह सदा कैवल्य को ही प्राप्त होता है।
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