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पैंगल • अध्याय 4 • श्लोक 25
अहं ब्रह्मेति नियतं मोक्षहेतुर्महात्मनाम्। द्वे पदे बन्धमोक्षाय न ममेति ममेति च॥
‘मैं ब्रह्म हूँ’ यही भाव महात्मा पुरुषों के मोक्ष का आधार होता है। बन्धन और मोक्ष के कारण रूप ये ही दो पद हैं, ‘यह मेरा है’ (बन्धन), ‘यह मेरा नहीं है’ (मोक्ष)।
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